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रूटीन का रोना || आज से बन्द -
रूटीन का रोना अरे कुछ नहीं, बस रूटीन ! किसी ने हालचाल पूछा और हमने रूटीन को कोसना शुरू किया। हम उसे इतना ज्यादा कोसते हैं कि वह हमारी आदत का हिस्सा बन जाता है। हम अलग तरह की जिंदगी के सपने देखते हैं और रूटीन को कोसते रहते हैं। मेरा मानना है कि एक अलग तरह की जिंदगी जीनी है, तो भी रूटीन जरूरी है। हम अपनी ज्यादातर जिंदगी तो रूटीन के सहारे ही निकालते हैं। और उसी को अक्सर कोसते रहते हैं। हम एक गलतफहमी में जीते हैं कि रूटीन असल जिंदगी नहीं है। हम जो काम कर रहे हैं, उसमें असल मजा नहीं है। जिंदगी का लुत्फ तो कहीं और है। उसका मकसद और मंजिल कहीं और है। मजा कहीं और है। सार्थकता कहीं और है। यह मानकर हम अपनी जिंदगी के बड़े हिस्से को बेकार के खाते में डाल लेते हैं। रोजमर्रा के काम को हम ढर्रा मान लेते हैं, जिसमें किसी किस्म की 'क्रिएटिविटी' नहीं है। यह सोच ही ठीक नहीं है। आखिर हम अपनी जिंदगी के बड़े हिस्से को निरर्थक कैसे मान सकते हैं। हमें अपने रूटीन को कायदे से लेना चाहिए। हम जब अपने अब में रहते हैं, तो रूटीन को अहमियत देनी होती है। काम करने का तो वही पल होता है। उस पल को नकारकर काम कर ही...
आज का ज्ञान...
आज का ज्ञान -- सभी स्कूल के प्रधानाचार्य शिक्षक एवं स्टॉप साथियों से विनम्र निवेदन है, ग्रीष्मकालीन छुट्टियां 17/18 मई से होने वाली है सभी विद्यालय लगभग 40 दिन बंद रहेंगे, तो ध्यान रखें खिड़की दरवाजे बंद करते !समय कमरों को अंदर से अच्छी तरह देख ले कोई पक्षी अंदर ना रह जाए अगर रह गया तो 40 दिन मैं उसकी भूख और प्यास से दर्दनाक मौत हो जाएगी इसलिए आपसे हाथ जोड़ विनम्र निवेदन है इस बात का विशेष ध्यान रखें प्रकृति पर सब का पूर्ण अधिकार है जियो और जीने दो 🙏🙏 सभी व्हाट्सएप ग्रुप & फेसबुक भाइयों से गुजारिश इस पोस्ट को कॉपी या अपने तरीके से गुरुजनों तक पहुंचाएं आप के हाथ और दिमाग की सोच से बहुत बड़ा पुण्य होगा🙏🙏 धन्यवाद...











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