संदेश

सौर मंडल एवं पृथ्वी

 1. धुव्रतारा कहा जाता है (a) उत्तरी तारे को  (b) दक्षिणी तारे को (c) पूर्वी तारे को (d) पश्चिमी तारे को 2. टाइटन किस ग्रह का प्राकृतिक उपग्रह है? (a) वरुण (c) शनि. (b) बुध (d) शुक्र 3. सूर्य से निकटतम ग्रह कौन है? (a) मंगल (b) बृहस्पति (c) शुक्र  (d) बुध 4. दक्षिणी गोलार्द्ध का सबसे 'लम्बा दिन' किस दिन होता है? (a) 21 मार्च (c) 23 सितम्बर (b) 21 जून (d) 22 दिसम्बर 5. भारत में कृषि को प्रभावित करने वाला मौसम का सबसे महत्वपूर्ण तत्व है (a) तापमान (c) पवन (b) आर्द्रता (d) दृष्टि 6. पृथ्वीतल पर उस काल्पनिक रेखा को क्या कहते हैं जो 180° मिरिडियम याम्योत्तर पर खिंची है? (a) अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा (b) कर्क रेखा (c) विषुवत रेखा (d) प्रधान याम्योत्तर रेखा. 7. टूटता तारा (उल्का) है. (a) एक समान गति से चलने वाला तारा (b) एक चमकता पिंड जो वायुमंडल में एक          समान गति से चलता है (c) एक तारा जिसके एक सिरे पर पूँछ होती है (d) उल्का जो पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते       ही आग पकड़ लेता है 8. एक नक्षत्र का रंग निर्भर करता है, उसकी (a)...

आज का ज्ञान...

 आज का ज्ञान -- सभी स्कूल के प्रधानाचार्य शिक्षक एवं स्टॉप साथियों से विनम्र निवेदन है,  ग्रीष्मकालीन छुट्टियां 17/18 मई से होने वाली है सभी विद्यालय लगभग 40 दिन बंद रहेंगे,  तो ध्यान रखें खिड़की दरवाजे बंद करते !समय कमरों को अंदर से अच्छी तरह देख ले कोई पक्षी अंदर ना रह जाए अगर रह गया तो 40 दिन मैं उसकी भूख और प्यास से दर्दनाक मौत हो जाएगी इसलिए आपसे हाथ जोड़ विनम्र निवेदन है इस बात का विशेष ध्यान रखें प्रकृति पर सब का पूर्ण अधिकार है जियो और जीने दो  🙏🙏 सभी व्हाट्सएप ग्रुप & फेसबुक भाइयों से गुजारिश  इस पोस्ट को कॉपी या अपने तरीके से गुरुजनों तक पहुंचाएं आप के हाथ और दिमाग की सोच  से बहुत बड़ा पुण्य होगा🙏🙏 धन्यवाद...

रूटीन का रोना || आज से बन्द -

रूटीन का रोना अरे कुछ नहीं, बस रूटीन ! किसी ने हालचाल पूछा और हमने रूटीन को कोसना शुरू किया। हम उसे इतना ज्यादा कोसते हैं कि वह हमारी आदत का हिस्सा बन जाता है। हम अलग तरह की जिंदगी के सपने देखते हैं और रूटीन को कोसते रहते हैं। मेरा मानना है कि एक अलग तरह की जिंदगी जीनी है, तो भी रूटीन जरूरी है। हम अपनी ज्यादातर जिंदगी तो रूटीन के सहारे ही निकालते हैं। और उसी को अक्सर कोसते रहते हैं।  हम एक गलतफहमी में जीते हैं कि रूटीन असल जिंदगी नहीं है। हम जो काम कर रहे हैं, उसमें असल मजा नहीं है। जिंदगी का लुत्फ तो कहीं और है। उसका मकसद और मंजिल कहीं और है। मजा कहीं और है। सार्थकता कहीं और है। यह मानकर हम अपनी जिंदगी के बड़े हिस्से को बेकार के खाते में डाल लेते हैं। रोजमर्रा के काम को हम ढर्रा मान लेते हैं, जिसमें किसी किस्म की 'क्रिएटिविटी' नहीं है। यह सोच ही ठीक नहीं है। आखिर हम अपनी जिंदगी के बड़े हिस्से को निरर्थक कैसे मान सकते हैं। हमें अपने रूटीन को कायदे से लेना चाहिए। हम जब अपने अब में रहते हैं, तो रूटीन को अहमियत देनी होती है। काम करने का तो वही पल होता है। उस पल को नकारकर काम कर ही...

गोपालकृष्ण गोखले , 1866-1915

गोपालकृष्ण गोखले, 1866-1915 गोपालकृष्ण गोखले जी का जन्म 9 मई, 1866 को कोल्हापुर (महाराष्ट्र) के एक ब्राह्मण वंश में हुआ। 1884 में स्नातक की उपाधि प्राप्त करने के बाद ये रानाडे द्वारा स्थापित दक्कन शिक्षा सभा (Deccan Education Society) में सम्मिलित हो गए। उन्होंने 1889 से अपना राजनीतिक जीवन आरम्भ किया। 1902 में वे बम्बई संविधान परिषद् तथा बाद में Imperial Legislative Council के लिए चुने गए। लंबे समय तक कांग्रेस के संयुक्त सचिव के पद पर कार्य करने के बाद इन्होंने  कांग्रेस के 1905 के बनारस अधिवेशन की अध्यक्षता की। 1909 के मिन्टो-मार्ले सुधारों को बनाने में भी इनकी भूमिका अग्रणी थी। 1910 में ये पुनः साम्राज्यीय विधान परिषद् के लिए चुने गये। 1912-15 तक उन्होंने भारतीय लोक सेवा आयोग के सदस्य के रूप में काम किया। भारत में राष्ट्रीय प्रचारक तैयार करने के उद्देश्य से गोखले जी ने 1905 में " भारत सेवक मंडल" की स्थापना की। इन्होंने  नमक कर, अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में भारतीयों को अधिक स्थान देने के मुद्दे को काउन्सिल में उठाया। गोखले उदारवादी होने के साथ-स...

सुरेंद्र नाथ बनर्जी,(1848-1925)

 सुरेंद्र नाथ बनर्जी,(1848-1925) उदारवादी विचारधारा से परिपूर्ण सुरेन्द्र नाथ बनर्जी का जन्म बंगाल के एक कुलीन ब्राह्मण परिवार में 1848 में हुआ। 1868 में इन्होंने स्नातक की शिक्षा प्राप्त की तथा ये पहले भारतीय थे जिन्होंने 1869 में भारतीय जन सेवा (I.C.S.) की परीक्षा उत्तीर्ण की। 1877 में सिलहट में सहायक दण्डाधिकारी (Asstt. Magistrate) के पद पर इनकी नियुक्ति हुई। लिटन द्वारा I.C.S. परीक्षा की आयु 21 वर्ष से घटाकर 19 वर्ष करने पर सुरेन्द्र नाथ ने देश भर में इसके विरुद्ध आंदोलन चलाया। बाद में वे राष्ट्रीय आंदोलन के एक महत्त्वपूर्ण नेता बन गए। उन्होंने 1876 में (इंडियन एसोसिएशन' की स्थापना की। उन्होंने बंगाली) नामक दैनिक समाचार पत्र का संपादन भी किया। सन् 1895 एवं 1902 में सुरेन्द्र नाथ बनर्जी कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। इन्होंने कलकत्ता कॉपोरेशन ऐक्ट, विश्व विद्यालय ऐक्ट तथा बंगाल विभाजन के विरुद्ध पूरे देश में आंदोलन चलाए तथा स्वदेशी आंदोलन एवं विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार आंदोलन का सफल नेतृत्व किया। मृत्यु- -1925 में इनकी मृत्यु हो गई।

दादा भाई नौरोजी, (1825-1917)

 दादा भाई नौरोजी( भारत के वयो वृद्ध नेता  grand old man of india) दादा भाई नौरोजी, 1825-1917 भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़े आरम्भिक नेताओं में दादा भाई नारोजी का नाम अग्रणी है। इसी कारण इन्हें श्रद्धा से भारत के वयोवृद्ध नेता " Grand Old Man of India) के नाम से स्मरण किया जाता है। 4 सितम्बर, 1825 को इन्होंने बम्बई के एक पारसी परिवार में जन्म लिया। इन्होंने एलफिन्स्टन कालिज में शिक्षा प्राप्त करने के बाद उसी कालिज में एक सहायक अध्यापक के रूप में जीवन आरम्भ किया। बाद वे एक पारसी व्यापार संस्था के साथ साझेदार के रूप में लंदन चले गए। परंतु 1862 में वहीं पर स्वतंत्र रूप से व्यापार शुरू किया। व्यापार में अधिक सफलता न मिल पाने के कारण 1869 में वापस बम्बई आ गये। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से उसके आरम्भ से लेकर अपने जीवन के अंतिम क्षण तक जुड़े रहे। वे इसके तीन बार (1886, 1893 तथा 1906 में अध्यक्ष रहे। दादा भाई नौरोजी,  1892 में उदारवादी दल द्वारा चुने जाने वाले ब्रिटिश संसद के प्रथम भारतीय सदस्य थे। उन्होंने बम्बई में ज्ञान प्रसारक मंडली व एक महिला हाई स्कूल की भी स्थापना की...